रविवार, 7 मार्च 2010

मेरे पड़ोसी ------( यह कविता मेरे एक मित्र ने मुझे भेजी है, आप सबको समर्पित है )

मेरे पड़ोस वाले घर में , बच्चे बम से खेलते है...
और मेरे बच्चे यहाँ गेंद से...
हर रोज़ युही मज़े से खेलते है..
अक्सर गेंद उनके घर में जाती है..
और उनके बम मेरे घर में आते है...
कल भी एसा ही दिन था, @pune
पडोसी गेंद लोटाते नहीं,
और हम भी उनके बम लोटाते नहीं ...
वो खुश किस्मत है ...
और हम ..